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पेरिनियल मसाज (Perineal Massage) क्या होता है? जाने मसाज करने का सही तरीका

पेरिनियल मसाज (Perineal Massage) क्या होता है? जाने मसाज करने का सही तरीका

11 Apr 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

गर्भधारण करने के बाद शिशु के होने का एहसास माँ के दिल को एक अजीब-सा सुकून देता है। पर जब बात नेचुरल डिलीवरी की बात आती है तो यही सुकून लेबर पेन और डिलीवरी के दौरान काँट-छाँट और दर्द की बात सोचकर गायब हो जाता है। अक्सर इसी दर्द की बात को सोचकर होने वाली माँ सिजेरियन करने के लिए अपना मन बना लेती हैं। लेकिन पेरिनियल मसाज (Perineal Massage) एक ऐसा मसाज है, जो नेचुरल डिलीवरी की प्रक्रिया को आसान कर देता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि हेयर मसाज, हेड मसाज या फेस मसाज जैसे बहुत सारे नाम सुने हैं, मगर ये पेरिनियल मसाज है क्या? आखिर प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के साथ इसका क्या संबंध है? कहीं इस मसाज से शिशु को तो कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा? तो चलिए आपके ऐसे ढेरों सवालों का जवाब हम आगे एक-एक करके देते हैं।

पेरिनियल मसाज

नेचुरल डिलीवरी के दौरान वजायना और एनस के बीच में एक पेरिनियम नाम का एक मांसपेशी होती है, जिसकी भूमिका इस प्रक्रिया में अहम होती है। बच्चे के जन्म के दौरान इस भाग को बहुत क्षति और दर्द का सामना करना पड़ता है। मांसपेशियों में लचीलेपन की कमी होने के कारण खिंचाव होता है, फलस्वरूप चीरा लगाने या पेरिनियम को काटकर डिलीवरी करने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए डॉक्टर एपिसियोटोमी प्रोसीजर का भी सहारा ले सकता है। 

पेरिनियल मसाज से पेरिनियम मसल में लचीलापन आ जाता है। सरल शब्दों में वजायना मसाज से लेबर पेन भी कम हो सकता है। तो फिर एक बार पेरिनियल मसाज (Perineal Massage During Pregnancy) के अन्य फायदों पर एक नजर डाल लेते हैं-

पेरिनियल मसाज के फायदे

  • पेरिनियम गुदा और योनि के बीच का मांसपेशी और टिशू है। डिलीवरी के दौरान पेरिनियम फट सकता है, इसलिए यह मालिश करने से पेरिनियम मसल में लचीलापन आता है और वह फैल भी जाता है।
  • पेरिनियल मसाज (Perineal Massage)से योनि में ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे गर्भावस्था की जटिलताएं कम होती हैं।
  • इस मसाज से वैक्यूम जैसे उपकरण का डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल करने की संभावना कम हो जाती है।
  • पेरिनियल मालिश से पेरिनियम के आसपास के जगहों की कठोरता कम हो जाती है, जिससे डिलीवरी की प्रक्रिया (Perineal Massage During Pregnancy) थोड़ी सरल हो जाती है।
  • यहाँ तक इस मसाज से बर्थ कैनल की चौड़ाई भी बढ़ जाती है, जिससे बच्चे के क्राऊनिंग के दौरान दर्द कम होता है।
  • पेरिनियल मालिश (Perineal Massage in Hindi) करने से एनस और वजायना को उत्तेजित हो जाते हैं, जिसके कारण वहाँ ब्लड का फ्लो भी बढ़ जाता है। इससे डिलीवरी के बाद सिर्फ जल्दी रिकवरी ही नहीं होती है बल्कि यह डिलीवरी के डर को कम करने में मदद करता है। 
  • वजायना का मालिश करने से उस क्षेत्र के टिशू मुलायम और लचीला हो जाते हैं, जिसके कारण मांसपेशियों के कटने-छिलने की संभावना कम होने के कारण दर्द से राहत मिलती है।

पेरिनियल मसाल बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से शुरुआत करने की गलती न करें। क्योंकि डॉक्टर आपके शारीरिक अवस्था को ध्यान में रखकर ही इस मसाज को करने की सलाह देंगे, ताकि आपको पेरिनियल मसाज के फायदा (Perineal Massage Benefits) पूरी तरह से मिल सके।

पेरिनियल मसाज कब शुरू करें?

प्रेग्नेंसी का 34 हफ्ता शुरू होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर आप पेरिनियल मसाज करना शुरू कर सकते हैं। 

पेरिनियल मसाज कितनी बार और कितने देर तक करनी चाहिए?

अगर आपसे हो सके तो आप सुबह-शाम दिन में दो बार या हफ्ते में 3-4 बार इस मसाज को कर सकती है। अगर आपके द्वारा यह मसाज करना संभव नहीं हो रहा है तो आप अपने पार्टनर की सहायता भी ले सकती हैं। इस वजायना मसाज को आप कम से कम 5 मिनट तक जरूर करें।

पेरिनियल मसाज कब नहीं करनी चाहिए?

अगर गर्भवती महिला को किसी भी प्रकार का वजायनल इंफेक्शन, वजायनल थ्रश और जेनिटल हर्पीस हैं तो इस मसाज को करने की गलती न करें। 

पेरिनियल मसाज करने के पहले की तैयारी

पेरिनियल मसाज (Perineal Massage in Hindi) शुरू करने के पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • हाथ के उंगलियों के नाखून को अच्छी तरह से काट लें ताकि उससे वजायना की त्वचा को कोई नुकसान न पहुँचें।
  • पेरिनियम को देखने के लिए एक आईना रखें।
  • मसाज करने के पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से गर्म पानी और साबुन से धो लें।
  • वजायना को लुब्रिकेंट करने के लिए विटामिन ई, ऑलिव ऑइल या आलमंड ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पेरिनियल मसाज करने का तरीका

पेरिनियल मसाज
पेरिनियल मसाज / चित्र स्रोतः गूगल
  • मसाज करने के लिए दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाकर अपने आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं।
  • बैठने के लिए एक दिवार का सहारा लें। सहुलियत के लिए पीठ के पीछे तकिया रखें। 
  • अब अंगूठे से वजायना को दबाएं और एक तरफ से हल्का से खींचें। अगर ज्यादा दर्द हो तो न करें। ऐसे अवस्था में 2 से 2.5 मिनट तक रहें। 
  • योनि में लगभग 2 इंच (5.1 सेमी) भीतर तक अंगूठा घुसाएं, और इसका इस्तेमाल धीरे से दीवार को बाहर की तरफ खींचने के लिए करें जहां 3 बजे मार्क किया है।
  • फिर बाहर की ओर दबाते और खींचते हुए, 6 बजे तक और 9 बजे से अधिक तक स्वीप करें।
  • अंगूठे और तर्जनी से  पेरिनियम को 4-5 मिनट तक मसाज करें।
  • मसाज के असर को और प्रभावी बनाने के लिए कीगल एक्सरसाइज भी कर सकती हैं।
  • अगर पार्टनर से मदद ले रही हैं तो वह अंगूठे का नहीं तर्जनी का इस्तेमाल करेगा।

बस एक बात का ध्यान रखें कि अगर पेरिनियल मसाज करते समय किसी भी प्रकार की असुविधा महसूस हो रही हो तो डॉक्टर को तुरन्त सूचित करें। 

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