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शिशुओं में रिफ्लक्स या दूध उलटना क्या बीमारी है?

शिशुओं में रिफ्लक्स या दूध उलटना क्या बीमारी है?

5 May 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 406 Articles

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि नवजात शिशु दूध पीने के तुरंत बाद उल्टी कर देते हैं। इसे मेडिकल टर्म में शिशुओं में रिफ्लक्स या दूध उलटना भी कहा जाता है। ऐसे में बच्चे का दूध उलटना कितना सामान्य या गंभीर हो सकता है, इसे लेकर हर पेरेंट्स चिंता में पड़ जाते हैं। यही खास वजह है कि बेबीचक्रा के इस लेख में हम शिशुओं में रिफ्लक्स या दूध उलटना क्या है, इसकी जानकारी दे रहे हैं। 

शिशुओं में रिफ्लक्स या दूध उलटना क्या है?

शिशुओं में रिफ्लक्स
शिशुओं में रिफ्लक्स / चित्र स्रोतः गूगल

जिस तरह वयस्कों में जीईआरडी, गैस, सीने में जलन व अपच से जुड़ी अन्य समस्याएं देखी जा सकती हैं, ठीक उसी तरह छोटे बच्चों में भी एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux in Babies) की समस्या देखी जा सकती है। इसे गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स (Gastroesophageal Reflux) भी कहते हैं। ऐसा होने पर खाने के बाद खाद्य सामग्री पेट की नली से वापस आ जाती है और उल्टी जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। 

क्या शिशुओं में रिफ्लक्स या दूध उलटने की वजह गंभीर हो सकती है?

आमतौर पर, वयस्कों की ही तरह शिशुओं में भी गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स हानिकारक हो सकता है। हालांकि, यह पाचन से जुड़ी समस्या को बढ़ा सकता है, जो सही आहार के जरिए आसानी से अपने-आप ठीक भी हो सकता है। इसलिए शिशुओं में दूध उलटने की वजह गंभीर नहीं मानी जा सकती है। 

वहीं, अगर बच्चे में यही समस्या हफ्ते भर से अधिक समय तक बनी रहती हैं, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टरी उपचार जरूरी होता है 

छोटे शिशुओं में एसिड रिफ्लक्स के कारण क्या हैं?

छोटे शिशुओं में एसिड रिफ्लक्स के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

  • पाचन प्रणाली का विकास होना
  • वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार, 6 माह तक के बच्चे अपना अधिकांश समय लेटे हुए गुजारते हैं। ऐसे में अगर शिशु को दूध पिलाने के तुरंत बाद बिस्तर पर लिटा दिया जाए, तो इसकी संभावना बढ़ सकती हैं कि शिशु दूध उगल दे। 
  • स्तनपान के दौरान माँ के दौरान खाना गया अत्यधिक तैलीय व मसालेदार भोजन
  • मौजूदा समय में माँ या बच्चे का इलाज हो रहा हो, जिस वजह से उन्हें कोई दवाई लेनी होती हो
  • स्तनपान से पहले माँ का सोडा पीना
  • शिशु को लैक्टोज असहिष्णुता होना
  • शिशु को भूख से ज्यादा स्तनपान करना या उसे ज्यादा भोजन खिलाना

शिशुओं में रिफ्लक्स या दूध उलटने के लक्षण

शिशुओं में दूध उलटना के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं, जैसेः

  • स्तनपान या आहार के बाद शिशु का तुरंत उल्टी कर देना
  • पिलाया गया दूध या आहार शिशु के मुंह में वापस आना
  • स्तनपान या आहार खाने के बाद शिशु को घुटन महसूस होना
  • निगलने में समस्या होना
  • स्तनपान के दोरान शिशु का चिड़चिड़ापन व्यवहार होना
  • स्तनपान से शिशु का मना करना
  • शिशु के गले से घरघराहट जैसी आवाज आना

इसके अलावा, अगर नीचे बताए निम्न में से कोई भी लक्षण बच्चे में दिखाई देते हैं, तो ऐसी स्थिति में तुंरत डॉक्टर से संपर्क करेंः

  • शिशु का सामान्य से अधिक रोना 
  • सांस फूलना
  • सामान्य के मुकाबले कम वजन बढ़ना
  • सांस लेने में समस्या होना
  • निगलने में समस्या होना
  • उल्टी में खून आना
  • मल में रक्त आना
  • शिशु का अचानक से सुस्त हो जाना
  • उल्टी में पित्त आना 
  • उल्टी का रंग हरा व पीला होना

किन शिशुओ में रिफ्लक्स (दूध उलटना) की समस्या अधिक हो सकती है?

आमतौर पर जन्म के शुरुआती हफ्तों में शिशुओं में रिफ्लक्स (दूध उलटना) की समस्या सामान्य हो सकती है, ऐसे विकसित हो रहे पाचन तंत्र के कारण हो सकता है। इसके अलावा, कुछ अगर बच्चे को नीचे बताई गई समस्याएं हैं, तो उसे रिफ्लक्स होने का जोखिम अधिक हो सकता है, जैसेः

  • शिशु का समय से पहले पैदा होना 
  • शिशु में सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis) या फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्या होना
  • शिशु के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली समस्याएं होना, जैसे – सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy)
  • बच्चे को जन्म दोष होना
  • हिटाल हर्निया (Hiatal Hernia) होना

शिशुओं में जीईआरडी (रिफ्लक्स / स्पिट अप) का निदान कैसे किया जाता है?

शिशुओं में जीईआरडी (रिफ्लक्स / स्पिट अप) का निदान (Diagnosis of Acid Reflux in Infants) करने के निम्नलिखित तरीके हो सकते हैंः

शिशुओं में रिफ्लक्स
शिशुओं में रिफ्लक्स / चित्र स्रोतः गूगल
  • शारीरिक परीक्षण – सबसे पहले डॉक्टर शिशुओं में रिफ्लक्स के सामान्य लक्षणों की पुष्टि कर सकते हैं, जैसे – दिन में कितनी बार शिशु उल्टी करता है, शिशु कब-कब उल्टी करता है, शिशु के मल व उल्टी का रंग आदि।
  • अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) एंडोस्कोपी (Upper Gastrointestinal (GI) Endoscopy) – यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर एंडोस्कोपी नामक उपकरण का इस्तेमाल करते हुए बच्चे के ऊपरी आंत्र के मार्ग की जांच करते हैं और बायोप्सी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आंत के ऊतक का नमूना लेते हैं। 
  • एसोफैगल पीएच मॉनिटरिंग (Esophageal pH Monitoring) – इस प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्य चिकित्सक पेट में मौजूद एसिड की मात्रा का पता लगाते हैं। 

शिशुओं में रिफ्लक्स (दूध उलटना) का इलाज कैसे किया जाता है? 

अधिकतर मामलों में बच्चे जैसे-जैसे 12 से 14 महीने के होते हैं उनमें दूध उलटने की वजह अपने आप दूर हो जाती है, इसके लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं हो सकती है। हालांकि, अगर बच्चे का दूध पलटना या स्पिट अप की समस्या गंभीर हो गई है, तो ऐसी स्थिति में शिशुओं में रिफ्लक्स (दूध उलटना) होने का इलाज (Treatment for Acid Reflux / Milk Spitting in Infants) निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है, जैसे-

  • जीवनशैली में बदलाव – बच्चे के खिलाने की मात्रा से लेकर, उसके आहार की मात्रा में बदलाव करना आदि। साथ ही, स्तनपान के बाद बच्चे को डकार दिलाना।
  • दवाएं – बच्चे की स्थिति व उम्र के अनुसार डॉक्टर बच्चे के लिए एच2 (H2) ब्लॉकर्स व प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (PPIs) जैसे दवाओं की खुराक भी निर्देशित कर सकते हैं। एच2 (H2) ब्लॉकर्स दवा पेट में एसिड बनने की मात्रा को कम करता है और प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (PPIs) बच्चे के पेट में एसिड का फॉर्मेशन बढ़ाने में मदद करता है।

शिशुओं में रिफ्लक्स (दूध पलटना) होने पर उन्हें स्तनपान कैसे कराएं?

शिशुओं में रिफ्लक्स (दूध पलटना) होने पर उन्हें स्तनपान कैसे कराएं (How to Breastfeed Babies When They Have Reflux (Milk Spitting), इस बारे में हमनें मैटरनल केयर और चाइल्ड न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉक्टर पूजा मराठे से बात की। इनका कहना है कि “ब्रेस्टमिल्क ओवरसप्लाई होने पर या फोर्सफुल लेट-डाउन (मिल्क इजेक्शन रिफ्लेक्स) होने की वजह से शिशुओं में रिफ्लक्स जैसे लक्षण हो सकते हैं। आमतौर पर सरल उपायों के साथ बच्चों में इसका इलाज भी किया जा सकता है। इसके लिए बच्चे के सोने की दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। स्तनपान के बाद जब तक पूरी तरह से सो नहीं जाता है, तब तक उसे अपराइट पोजीशन में लिटाए रखना चाहिए।”

साथ ही, कुछ अन्य सुझावों का भी पालन किया जा सकता है, जैसेः

  • बच्चों को दूध पिलाने के लिए ऐसी बोतल का इस्तेमाल करें, जिसमें की दूध की मात्रा नापने का पैमाना दिया गया हो। 
  • जब बच्चा पहली बार वाले स्तनपान को पचा लें, तभी उसे दोबारा स्तनपान कराएं।
  • शिशु को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में करके स्तनपान कराएं। एक बार में अधिक मात्रा में दूध न पिलाएं।
  • दूध पिलाने के दौरान और बाद में बच्चे को सीधा रखें।
  • स्तनपान के बच्चे को अपराइट पोजीशन में लेकर डकार दिलाएं।
  • स्तनपान कराने के बाद बच्चे को थोड़ी देर तक खेलने दें।
  • स्तनपान के दौरान या बाद में बच्चे को बहुत कसा हुआ डायपर या कपड़ा न पहनाएं।
  • साथ ही, स्तनपान के दौरान माँ को भी अपना आहार में बदलाव लाना चाहिए। नई माँ को मसालेदार व तैलीय भोजन से बचना चाहिए।
  • इसके अलावा, दूध के बोतल की निप्पल का आकार कितना है, इसका ध्यान रखें। अगर निप्पल का आकार बड़ा हो गया है, तो उसे बदल दें।

शिशुओं में रिफ्लक्स यानी दूध उलटना की समस्या होने पर पेरेंट्स को चिंता नहीं करनी चाहिए। बच्चे के सोने व स्तनपान के तरीकों में बदलाव व सुधार करके इस समस्या से आसानी से राहत पाई जा सकती हैं। हालांकि, अगर बच्चे का दूध पलटना जारी रहता है, तो डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए और छोटे शिशुओं में एसिड रिफ्लक्स के कारण की पुष्टि करनी चाहिए।

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