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Lactose Intolerance : शिशुओं में लैक्टोज इनटॉलेरेंस को कैसे संभालें?

Lactose Intolerance : शिशुओं में लैक्टोज इनटॉलेरेंस को कैसे संभालें?

8 Jul 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 549 Articles

बच्चों में लैक्टोज इनटॉलेरेंस (Lactose Intolerance) क्या है और लैक्टोज इनटॉलेरेंस के कारण, लक्षण और बचाव के बारे में हमने विस्तार से इस लेख में बात की है। साथ ही किस तरह से बच्चों में लैक्टोज इनटॉलेरेंस का पता लगाया जा सकता है, इस बात का जिक्र भी किया है। आप नीचे स्क्रॉल करके लैक्टोज असहिष्णुता से जुड़ी सारी जानकारी हासिल कर सकते हैं।

लैक्टोज असहिष्णुता क्या है | What is Lactose Intolerance in Hindi

अगर बच्चा को ऐसे खाद्य पदार्थों नहीं पचा पाता है, जिसमें  लैक्टोज है तो यह लैक्टोज इनटॉलेरेंस कहलाएगा। यह लैक्टोज एक प्रकार का शुगर है, जो दूध और अन्य डेयरी खाद्य पदार्थों में होता है। दरअसल, शरीर को लैक्टोज पचाने के लिए लैक्टेज एंजाइम की आवश्यकता पड़ती है। अगर बच्चे की आंत में इस एंजाइम की कमी होगी, तो उसे लैक्टोज असहिष्णुता होगी।

क्या लैक्टोज असहिष्णुता और दूध एलर्जी समान हैं | Lactose Intolerance and Milk Allergy in Hindi

नहीं, यह दोनों अलग हैं। हां, लैक्टोज असहिष्णुता और दूध एलर्जी के लक्षण एक जैसे ही होते है। इसी वजह से अधिकतर लोग इन्हें एक ही मान लेते हैं। लेकिन, लैक्टोज असहिष्णुता पाचन विकार है, जिसमें लैक्टोज शुगर पच नहीं पाता। यह दिक्कत आमतौर पर बचपन में कुछ साल बाद, किशोरावस्था में या वयस्कता में नजर आती है। 

मिल्क एलर्जी इसके विपरित एक इम्यून संबंधी विकार है। इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली, शरीर में दूध में मौजूद किसी एक या उससे अधिक प्रोटीन के आते ही प्रतिक्रिया करने लगती है।  यह शिशुओं और छोटे बच्चों में होना आम है। दूध से एलर्जी होने वाले बच्चे में पित्ती, मुंह में सूजन, घरघराहट, होठों में खुजली, दस्त और उसमें रक्त, आदि शामिल हैं। यह एक प्रकार की एलर्जी होने के कारण गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया एनाफिलेक्सिस का कारण बन सकता है।

चलिए, लेख में आगे बढ़ते हुए लैक्टोज इनटॉलेरेंस के कारण समझते हैं।

लैक्टोज इनटॉलेरेंस के कारण और जोखिम कारक | Causes and Risk Factors of Lactose Intolerance in Hindi

लैक्टोज इनटॉलेरेंस होने के कारण और जोखिम कारक पर हम विस्तार से बताएंगे। 

  • शिशु का समय पूर्व जन्म होना लैक्टोज इनटॉलेरेंस का कारण बन सकता है।
  • बच्चे की आंत में लैक्टोज एंजाइम का उत्पादन कम होने या न होने के कारण लैक्टोज असहिष्णुता होती है। 
  • शिशु के छोटी आंत में कोई बीमारी हो, तो उसे लैक्टोज इनटॉलेरेंस हो सकता है। उदाहरण के तौर पर – छोटी आंत में संक्रमण होना, जैसे – रोटावायरस, क्रोहन रोग होना, आदि।
  • अगर नवजात को किसी भी तरह का आनुवंशिक दोष यानी जेनेटिक डिफेट होगा, तो भी यह लैक्टोज इनटॉलेरेंस का जोखिम हो सकता है।
शिशुओं में लैक्टोज इनटॉलेरेंस | Lactose Intolerance In Children in Hindi
दूध पीने के बाद शिशुओं में लैक्टोज इनटॉलेरेंस होना| Lactose Intolerance In Children in Hindi

लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण | Symptoms of Lactose Intolerance in Children in Hindi

लैक्टोज इनटॉलेरेंस के लक्षण के रूप में बहुत-से संकेत दिखते हैं। यह लक्षण दूध या अन्य डेयरी वाले खाद्य पदार्थ लेने के 30 मिनट से लेकर 2 घंटे में यह नजर आ सकते हैं। क्या हैं लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण आगे समझते हैं। 

लैक्टोज असहिष्णुता का पता कैसे लगेगा | Diagnosis of Lactose Intolerance in Hindi

बच्चे में लैक्टोज इनटॉलेरेंस के लक्षण दिखने पर यह संकेत मिलता है कि यह दिक्कत हो सकती है। इस बात की पुष्टि करने के लिए कुछ टेस्ट किया जा सकते हैं। जानिए, कैसे लैक्टोज असहिष्णुता का निदान होता है –

  • सबसे पहले डॉक्टर भी बच्चे में नजर आने वाले लैक्टोज इनटॉलेरेंस के लक्षण पूछता है। फिर शारीरिक परिक्षण करते हैं।
  • सांस से संबंधी टेस्ट करके भी लैक्टोज इनटॉलेरेंस का पता लगाया जा सकता है। इस ब्रीद टेस्ट कहते हैं। इस दौरान हाइड्रोजन का स्तर जांचा जाता है। यह अधिक होगा, तो लैक्टोज इनटॉलेरेंस हो सकता है।
  • रक्त परीक्षण से भी लैक्टोज असहिष्णुता का पता लग सकता है। इस दौरान लैक्टोज शुगर और ग्लूकोज का पता लगाकर लैक्टोज इनटॉलेरेंस का निदान किया जाता है। 
  • पीएच स्तर (pH level) की जांच करके भी लैक्टोज असहिष्णुता का निदान होता है। इस दौरान स्टूल यानी मल का pH स्तर जांचा जाता है, जिससे स्पष्ट हो जाता है कि लैक्टोज इनटॉलेरेंस है या नहीं। 

लैक्टोज असहिष्णुता से बचने के उपाय | Prevention Tips for Lactose Intolerance in Hindi

बच्चों में लैक्टोज असहिष्णुता को संभालने के लिए बच्चे की डाइट पर ध्यान देना होगा। यह उपाय कुछ इस तरह के हैं – 

  • लैक्टोज वाले खाद्य पदार्थ  बच्चे को देने से बचें। इसमें दूध, छाछ, पनीर, आदि शामिल हैं।
  • आंत से जुड़ी परेशानी के कारण लैक्टोज असहिष्णुता हो सकती है, इसलिए आंत को स्वस्थ रखें। डॉक्टर से आंत की बीमारी का इलाज करवाएं। इससे लैक्टोज असहिष्णुता ठीक हो सकती है। 
  • आंत को स्वस्थ रखने वाले योग व व्यायाम भी किया जा सकता है।
  • बच्चे को फाइबर युक्त आहार दें। यह पेट के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।
  • बच्चा अगर बड़ा हो गया है, तो सही मात्रा में पानी दें। यह आंत के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
  • जंक फूड्स देने से बचें।

बस तो इस तरीके से आप बच्चे में लैक्टोज इनटॉलेरेंस का पता लगा सकते हैं। साथ ही यहां हमने कुछ तरीके भी बताए हैं, जिनकी मदद से लैक्टोज इनटॉलेरेंस को संभाला व इससे बचाव किया जा सकता है। इसी तरह के लेख पढ़ने के लिए बेबीचक्रा का बेस्ट पैरेंटिंग एपलिकेशन डाउनलोड करें।

चित्र स्रोत – pexels

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